आध्यात्मिक भजन: हित पद संग्रह

  • प्रस्तावना
  • मंगलाचरण
  • मंगलवर्धन जिनवाणी आईजी
  • द्रव्य बना है भाव बना है
  • धन्यवीर प्रभुजी! ज्ञान जगत में
  • स्वतः परिणमित वस्तु के
  • कहा मान ले ओ मेरे भैया
  • परको मालिक बनतो आयो
  • ये मोह महा दुःख खान
  • होता विश्व स्वयं परिणाम
  • ओ कुण है मेटनहार
  • चेतन क्यों पर अपनाता है
  • जिनगुण गांवा हर्षावां
  • गुणीजन अंतस प्रभुपद ध्याय
  • मैं तो थांरा दर्शन करने आया
  • आतम के अन्तस खानी ही
  • कर्ता बनना तो परका छोड़ दो
  • कहो कहा किससे चहें
  • अयि आत्मन! ज्ञानामृत
  • नमूँ अरिहंत सिद्ध महान
  • अहो चेतन समय पाकर
  • प्रस्तावना
  • मंगलाचरण
  • गुणीजन अन्तस अरिहंत ध्याय
  • सुख दुखनी रचना
  • ये समझ तुम्हारी ठीक नहीं
  • पूर्व पुखलावती में
  • जन्म मरण री बेल्यां
  • अरिहंत अरिहंत
  • करता तो भोला देहरो गुमान
  • वंदन अरिहंत सिद्ध प्रभुजी ने
  • समझ के जोर से जी
  • जगत स्वाभाव से आता
  • चेतनवंश की वीर वृत्तियां
  • पुद्‌गल सुख की धक
  • जब निज निज करता दीखे
  • परको मालिक बनतो आयो
  • आत्मार्थी जीव आयो झानेश्वर
  • ज्ञान स्वयं महावीर है
  • अरिहंत ध्यायाजी
  • शांति समर में झान राग बिच
  • कटुकवचन बहुबोलिया जी
संपर्क सूत्र:
सुमति कुमार सेठिया
Email: sethiasumatikumar@gmail.com
Mob.: 91-9312218886

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